Home / ब्रेकिंग न्यूज़ / किस किस नेता को जिला अध्यक्ष बनाने के लिए हो रही है माथापच्ची

किस किस नेता को जिला अध्यक्ष बनाने के लिए हो रही है माथापच्ची

भाजपा का नया अध्यक्ष कौन ? कमल,राजेश या फिर वेद ?

भोपाल में माथापच्ची जारी,तोमर ने नही खोले पत्ते,पितृ पक्ष के पहले हो सकता है फैसला
– विवेक सैनी –
भोपाल /ग्वालियर । भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर ऐसे सभी जिला अध्यक्षों को हटाने में लगी है जिनके परफॉर्मेंस को लेकर पार्टी के अंदरूनी सर्वे में माइनस मार्किंग आई है । प्रदेश में ऐसे 20 संगठनात्मक जिले शिनाख्त हुए थे ।इनमे ग्वालियर के शहर और ग्रामीण दोनों जिले भी शुमार है । पांच रोज में दस जिलों के विकेट गिर चुके है अब ग्वालियर पर माथापच्ची जारी है । हो सकता है ग्यारह अगस्त तक ग्वालियर को नए जिला अध्यक्ष मिल जाये ।
ग्वालियर में देवेश शर्मा शहर के जिला अध्यक्ष है । वैसे वे दूसरे कार्यकाल में अध्यक्ष बने है । लेकिन उनके दोनों ही कार्यकाल संगठन के लिए मुसीबत बन गए । पहले जब वे अध्यक्ष बने थे तब कार्यकारिणी घोषित करने के महज कुछ घंटों बाद ही पार्टी को उन्हें कार्यकारिणी सहित पद से बर्खास्त करना पड़ा था ।
वे ग्वालियर सांसद और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर की पसंद है । इसलिए एक बार फिर उन्हें जिला अध्यक्षी सौंपी गई । लेकिन वे पार्टी में समन्वय बनाकर काम करने में असफल रहे । स्वयं अपनी टीम में भी वे आपसी भाईचारा कायम नही कर सके । पार्टी ने जब अपने निर्देशों की पालना रिपोर्ट मंगाई तो वह निगेटिव आई । इस बजह से प्रदेश संगठनमंत्री से लेकर राष्ट्रीय संगठनमंत्री तक ने शर्मा के कार्य के प्रति अप्रसन्नता जाहिर की । यहां तक कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भोपाल आये तो बैठक में ग्वालियर को लेकर प्रदेश की बड़ी किरकिरी हुई ।
सूत्रों की माने तो प्रदेश संगठन ने अपने दूत भेजकर संघ और भाजपा दोनों के बीच सर्वे कराया तो रिपोर्ट में माना गया कि यहां सब कुछ गड़बड़ है । संगठन के पदाधिकारियों के बीच कोई सामंजस्य नही है । संगठन की कई बैठकों और कार्यक्रमो की सूचना तक उन्हें अखबारों से मिलती है । पदाधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर सवाल उठते है । संघ ने भी साफ कह दिया था कि वर्तमान नेतृत्व के चलते चुनावो में दिक्कत आएगी ।
ग्रामीण में भी हालत खराब बताई गई है । इसकी बजह ये भी है कि वर्तमान अध्यक्ष श्री जैन को डॉ नरोत्तम मिश्रा की इच्छा के खिलाफ बनाया गया था । वे भी वहां पार्टीजनों के बीच कोई समन्वय नही बना पाए । वहां पार्टी लगातार सभी चुनाव हारती रही है । नपा अध्यक्ष के उप चुनाव में संगठन मंत्री ने खुद कमान संभाली तब जीत मिली । इस बार भाजपा डबरा विधानसभा सीट जीतने में कोई कसर नही छोड़ना चाहती लिहाजा जिला अध्यक्ष डॉ नरोत्तम मिश्रा की पसंद का अध्यक्ष बनाना चाहती है ।
कबायद जारी
सूत्रों की माने तो ग्वालियर के संगठनमंत्री शैलेन्द्र बरुआ भोपाल में आला नेताओं के साथ नए अध्यक्ष के नाम पर माथापच्ची करने में जुटे है । इस पद के लिए तीन नाम है ।
 पहला नाम कमल माखीजानी का है । वे लगातार महामंत्री है और सिंधी समाज मे खासा प्रभाव रखते है ।उनकी कार्यशैली संगठनात्मक दृष्टि से अच्छी मानी जाती है । वे गुट निरपेक्ष माने जाते है । प्रदेश में फिलहाल कोई सिंधी प्रौढ़ नेता नही है लिहाज इसके जरिये पार्टी न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश के सिंधी समाज को भरोसा देना चाहती है ।
दूसरा बड़ा नाम है राजेश सोलंकी का । वे हरयाणा के राज्यपाल प्रो कप्तान सिंह सोलंकी के बेटे है और बचपन से संघ से जुड़े है । उन्हें प्रदेश संगठनमंत्री सुहास भगत का नजदीकी माना जाता है । भगत ने प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य बनाया और ग्वालियर का प्रभार ही नही सौंपा बल्कि सभी प्रमुख आयोजन उन्ही के हवाले रहता आया है ।
तीसरा नाम वरिष्ठ नेता वेद प्रकाश शर्मा का है । वे दो बार संकटकाल में जिला अध्यक्ष बनाये जा चुके है । शिवराज के इस कार्यकाल में उन्हें पूरे समय हंसिये पर रखा गया । संगठन या सत्ता में उन्हें कोई जिम्मेदारी नही सौंपी गई ।
अब जब पार्टी फिर संकट में है तो फिर उनके नाम पर विचार शुरू हुआ लेकिन श्री शर्मा एक बार फिर इसी पद पर बैठने के इच्छुक नही है ।परंतु पार्टी में अगर किसी एक नाम पर रजामंदी नही हुई तो फिर पार्टी तुरुप के पत्ते की तरह उन्हें चुनावी बाज़ी में फिर फेंक सकती है । लेकिन सारा दारोमदार नरेंद्र सिंह तोमर पर है जिन्होंने फिलहाल अपने पत्ते नही खोले हैं ।
 कमल माखीजानी
पक्ष
-उदीयमान सिंधी नेता
-सिंधी युवाओ पर एकछत्र पकड़
– दो बार महामंत्री रहे ।
– सभी गुटों से समन्वय ।
– सभी नेता और कार्यकर्ताओं से सीधा संबंध ।
– शहर के वुद्धिजीवियों और कलाकारों से बेहतर तालमेल ।
विपक्ष
– वर्तमान अध्यक्ष देवेश शर्मा के नापसंद ।
– शेजवलकर गुट से संबंध होने से बाकी गुटों से दूरी ।
– सिंधी समाज का होना ।
– ठाकुर – ब्राह्मण की स्वीकार्यता पर संदेह ।
– संगठन के मद्देनजर काम करने वाले
        राजेश सोलंकी
पक्ष
– संघ और भाजपा के कद्दावर नेता कप्तान सिंह सोलंकी के बेटे है ।
– क्षत्रीय समाज से है ।
– संघ के कारण संगठन को ठीक से चलाने का माद्दा रखते है ।
– कार्यकर्ताओं से सीधा संबंध ।
विपक्ष
– एकला चलो की नीति से बाकी नेता खफा ।
– तोमर गुट की नापसंद ।
– क्षत्रीय समाज की प्रभावी जातियों से न होना ।
– सभी गुट के नेता और कार्यकर्ताओं से समन्वय नही ।
वेद प्रकाश शर्मा
पक्ष
– ब्राह्मण होना ।
– पार्टी के सभी बड़े नेता जानते हैं ।
– दो बार सफल अध्यक्ष रहना ।
– कुशल संगठन क्षमता ।
– सभी कार्यकर्ताओं से सीधा संबंध ।
विपक्ष
– तीसरी बार अध्यक्ष बनने के इच्छुक नहीं ।
– ज्यादातर बड़े नेता संमर्थक नही ।

Check Also

वीरंगना लक्ष्मीबाई एवं इंदिरा गांधी को कॉंग्रेसिओं  ने किया याद

ग्वालियर। 19 नवंबर को वीरंगना महारानी लक्ष्मीबाई एवं भारत रत्न प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.