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शाजापुर में अनूठी है गोवर्धन पूजा की परंपरा

शाजापुुर।

 

 

 

 

दीवाली के दूसरे दिन  दिन यूं तो हर जगह गोवर्धन पूजा की जाती है. लेकिन शहर के गवली समाज द्वारा की जाने वाली गोर्वधन पूजा अपने आप में अनूठी है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

यहां सुबह समाज की महिलाएं एक जगह इकठी होकर गाय के गोबर से गोर्वधन पर्वत की अनुकृति बनाती है. जिसके बाद हर घर से खीर-पूरी और मिठाई भोग लगाने के लिए लाई जाती है. इस दौरान खास तौर पर हर घर से एक कुल्हड़ में गाय का दूध लाया जाता है.

 

 

 

 

 

 

 

 

इसके पीछे मान्यता है कि यह दूध पीने से वर्ष भर व्यक्ति निरोगी रहता है. सामुहिक पूजा के बाद समाज के पुरूष हाथोंं में धानी और बताशे लेकर गोवर्धन पर्वत की सात परिक्रमा लगाएंगे. जिसके बाद शुरू होती है बच्चों को गोर्वधन पर्वत पर लेटाने की अनूठी परंपरा. जिसमें एक दिन के बच्चे से लेकर युवाओं को गोबर से बने गोर्वधन पर्वत पर लेटाया जाता है.

 

 

 

 

 

 

 

 

जिसके पीछे गवली समाज की मान्यता है कि इससे बच्चों को किसी तरह की बीमारी नहीं होती. यह परंपरा समाज में सैंकड़ों वर्षों से प्रचलित है. गोवर्धन पर्वत का बचा हुआ गोबर देव उठनी एकादशी पर समाजजन अपने-अपने घर ले जाते हैं. जिससे रसोई घर और पूजा घर में लिपा जाता है. ताकि घर में सुख समृद्घि और शांति बनी रहे. खास बात यह है कि आधुनिकता के बदलते दौर में भी समाजजन अपनी अनूठी परंपरा को बड़े ही उत्साह और आस्था के साथ निभाते हैं.।

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